यूँ ही नहीं ढूंढता मै उसे बार बार...!! एक हिस्सा है मेरा जो खो गया है उसमें...!!!!
तुम्हारे पैरोँ की खाक उठा कर सुरमा लगाऊँ...!! फिर तो..मानोगे..मोहब्बत है...????
महक़ते कागज़ पर लिखी हुईं सुनहरे हर्फों में...!! ज़िन्दगी जिसको गुनगुनाये वो ग़ज़ल हो तुम...!!!!
वो चाय की तरह गर्म मिजाजी है और कड़क है फिर भी सुकून मिलता है उसे ओठो से लगाने के बाद।
कुछ बातें उनकी बेचैन करती हैं...ll आफ़त तो ये है साहेब कि...... उनकी बेचैन भरी बातों से भी,,, "" इश्क़"" है हमे...ll 💞🥀💦🥀💦💞
कोई मुझसे मिलकर चला गया...!! वो मुझमें रह गया.. मैं उसमें चला गया...!!!!
दिल कहता है तेरे बा़द कोई तुझ सा न हो मैं तुझे ही आख़री तहरीर बना कर लिखूं ...❤️
वादों के लिये हमदम एक वादा तो कीजिये...!! मेरी जिन्दगी मे आने का इरादा तो कीजिये...!!!!
तुम्हारे इश्क की नजर लग जाये इस खयाल मैं कब से बैठे है.... काजल तुम लगाओ हम इसके दीवाने हुए बैठे है... ✍✍
हंसकर बात करता हूँ फिर भी जान जाती है... परेशान क्यो है, माँ ही तो है जो बेटा कहकर बाहों में जकड़ लेती है...✍✍
“जो हो कर भी न हो... उसका होना कैसा सिर्फ नाम के रिश्ते से शिकवा कैसा...रोना कैसा।”
बस इक निगाह की थी उस ने...!! सारा चेहरा निखर गया है...!!!!
“किसी को बाँधें रखना फ़ितरत नहीं है मेरी, मैं मोहब्बत का धागा हूँ... मजबूरी की ज़ंजीर नहीं।”
मोहब्बत छिपाने की अदा,यूँ बेकार हो गयी...!! जुबां तो रही बस में, आँखें गद्दार हो गई...!!!!
एक ठहरा हुआ दरिया है, मेरी आँखों में...!! जाने किस घाट पे मारेगी तेरी प्यास मुझे...????
तुम तो वफाओं का समंदर हुआ करती थी...!! फिर किस से सीख लिया यूँ मुहब्बत में मिलावट करना...????
“तूने देखा ही नहीं रुखसत के वक़्त, कितने वास्ते थे मेरी आंखों में।”
सोच समझकर फ़ैसला लेना "जान" कहने का... तय है "जान" का एक रोज बिना कहे निकल जाना...
इश्क वो है जिसे सब्र का लिहाज नहीं...! बेहद नशीला है ये,, इसका कोई इलाज नहीं...!! 💖
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