“हम जब हारे थे तुमसे..., वो जीत तुम्हारी भी नहीं थी।”
मेरे शब्दों की उम्र बस इतनी...!! तेरी नज़रों से शुरू.. तेरी मुस्कान पे खत्म...!!!!
“आ थक के मेरे पास कभी बैठ तो हमदम, तू खुद को मुसाफिर... मुझे दीवार समझ ले!”
ये चाहतों के सिलसिले और बेखुदी ज़रा ज़रा...!! वो मुख़्तसर सी ख्वाहिशें और आशिक़ी ज़रा ज़रा...!!!!
मैने एक उम्र मैं देखी है कई बार क़ज़ा...!! मैंने एक उम्र मैं चाहा है कई बार तुझे...!!!!
“वो मेरी आखरी सरहद हो जैसे, सोच जाती ही नहीं उस से आगे।”
आधे से...कुछ ज्यादा हैं... पूरे से...कुछ कम... कुछ जिन्दगी...कुछ गम... कुछ इश्क 💞... और...कुछ हम...
इस तरह दिल में समाओगे मालूम न था... दिल को इतना तड़पाओगे मालूम न था... सोचा था कि दूर हो तो याद तो आओगे... मगर इस कदर याद आओगे मालूम न था... ✍✍
दिल में अगर..इश्क़-ऐ-मुस्तफा ही नहीं...!! दिल धड़कने का..फिर मज़ा ही नहीं...!!!!
“उसने उस वक़्त किनारा किया..., ऐतबार जब आखिरी मुक़ाम पे था।”
ना जाने इतनी मुहब्बत कहां से आई है उसके लिये... कि मेरा दिल भी मुझसे रूठ जाता है उसके लिये... ✍✍
अपनी अधूरी हसरतों को गिनना शुरू कर दिया हमने... जब भीड़ में दम घुटने लगा तो अकेले रहना शुरू कर दिया हमने... ✍✍
साज़िशें लाखो बनती है मेरी हस्ती मिटाने की, बस दुआयें आप लोगों की उन्हें मुकम्मल नहीं होने देती !!
तेरी खुशबू मुझे महका जाती है, तेरी हर बात मुझे बहका जाती है... सांस को बहुत देर लगती है आने में, हर सांस से पहले तेरी याद आ जाती है... ✍✍
जहां दिल लग जाए जनाब..! वहां दिमाग मत लगाया करो।😇
“अब रातभर ये उधम मचाएँगी, ख्वाहिशें दिन में ख़ूब सोयीं हैं।”
मिट्टी भी जमा की और खिलौने भी बना कर देखें ज़िन्दगी कभी न मुस्कुराई फिर बचपन की तरह।
पेड़ से कटी हुई डालिया कभी छांव नही देती... हद से ज्यादा की हुई उम्मीदे हमेशा घाव देती है... ✍✍
याद कर लेना मुझे तुम कोई भी जब पास न हो, चले आएंगे इक आवाज़ में भले हम ख़ास न हों।।
लम्हा लम्हा गुज़रता है.....वक्त !! और पूरा साल गुज़र जाता है ।। बूंद बूंद रिसती है...... याद ! पर गुज़रती क्यों नहीं।।
हसरतें, ख्वाहिशें, दिल़ की आवारगी...!! हमसें पुछो मोहब्बत की दीवानगी...!!!!
मोहब्बत का शौक ना रखिये साहब इसमे सांस आती नहीं और जान जाती नही ....
ठोकरों से सीखी है.... मैंने बातें सच्ची, . . दिखावे की यारियों से... दूरियां अच्छी !!
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