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हम तो झुके थे... ”तेरे” इश्क 💞 में... “तूने” तो गिरा हुआ ही समझ लिया...
तुम मयखाने चले गए पीने प्याले शराब के, . . क्या इतना भी नशा नहीं बचा अब मेरे शबाब में ?
नज़रे ढूँढती है जिसको, वो प्यारा सा ख्वाब हो तुम... मिलती तो है दुनिया सारी, मिले बिना भी लाज़वाब हो तुम... ✍✍
“इंतज़ार उसका ही करना.., जिसे आपके हर लम्हें की क़ीमत हो..!!”
उनको देखने पर जो मिलता है ! सारा मसला उसी सुकून का है !!
इक मुलाक़ात मुख़्तसर होगी हाँ मगर रूह तक खबर होगी हम ही हम होंगे उन नज़ारों में आपकी जिस तरफ नज़र होगी रात को यों ही बीत जाने दो ख़्वाब देखेंगे जब सहर होगी
"उसी" से पूछ लो इश्क़ 💕 की क़ीमत... हम तो बस भरोसे पर बिक गए...
“ग़ैरों से तो फ़ुर्सत तुम्हें दिन रात नहीं है, हाँ... मेरे लिए ही वक़्त-ए-मुलाक़ात नहीं है।”
राज तो हमारा हर जगह पे है... पसंद करने वालों के दिल ❤️ में... और... नापसंद करने वालों के दिमाग 🧠 में...
हद से ज़्यादा भी प्यार मत करना दिल हर एक पे निसार मत करना क्या खबर किस जगह पे रुक जाये सांस का एतबार मत करना
आईने की नज़र न लग जाये इस तरह से सिंगार मत करना तीर तेरी तरफ ही आएगा तू हवा में शिकार मत करना डूब जाने का जिसमे ख़तरा है ऐसे दरिया को पार मत करना देख तौबा का दर खुला है अभी कल का तू इंतज़ार मत करना मुझको खंज़र ने ये कहा है तू अँधेरे में वार मत करना
कान्हा दिल धड़कन रूह सब रंग गए तेरे ही रंग में इत्र की तरह महकते हो तुम मेरे जहन में। राधे-राधे।🙏
इक हर्फ़ नहीं मुमकिन लिखना तेरे बग़ैर...!! मेरा ख़ुद से अधूरा है रिश्ता तेरे बग़ैर...!!!!
आंसुओं का शायद इस लिए कोई रंग नहीं होता... क्योंकि जब वह आते हैं तो कोई संग नहीं होता... ✍✍
जब मर्जी होती है उनकी तब बात करते है... हमारा पागलपन तो देखो हम पूरा दिन उनकी मर्जी का इंतजार करते है... ✍✍
दिवाने है हम तुम्हें भी दिवाना बना देंगे। दिलमें तुम्हारे प्यार की शमा जला देंगे।। चाहे रहो जितना भी पथ्थर दिल बनके। पर यादों से अपनी तुम्हें भी रुला देंगे।।
माना के आपका वक़्त कीमती है... मगर दो पल बर्बाद कर लीजिए... यूँ तो कुछ नहीं हम फिर भी... हमें भी कभी याद कर लीजिये...
वो मुहब्बत ही क्या जिसमे साथ कुछ पल का ही हो... मुहब्बत तो वही है जो मरते दम तक कम ना हो... ✍✍
वो जो शामिल था मेरी दुआओं में.. बिन मांगें किसी को मिल गया ..!
धड़कन प्रेम बीज बो रही है बातें शब्द खो रही है खामोशी है हर तरफ आँखो आँखो में चाय ठण्डी हो रही है। ❤☕
मरने वाले को क्या रो रहे हो साहिब , बेबसी तो देख जिने वाले की ..
पत्थर नही हूँ मुझमें भी थोड़ी नमी है... दर्द बयां नही कर कर पाता शायद यही मेरी कमी है... ✍✍
इंतज़ार की आरज़ू अब खो गई है खामोशियों की आदत हो गई है ना शिकवा रहा ना शिकायत किसी से अगर है तो एक मोहब्बत, जो इन तन्हाईयों से हो गई है।
तेरी मोहब्बत से मुझे इनकार नहीं... कौन कहता है सनम मुझे तुझसे प्यार नहीं... तुझसे वादा है साथ निभाने का... पर मुझे अपनी साँसों पर ऐतबार नहीं... ✍✍
भीगती पलकों में अक्सर जो इंसा परखना भूल जाते हैं वो इश्क़ को बेवजह उम्र भर झूठ और धोखा बताते हैं अकेले मन में, खूब चढ़ता है झूठ का रंग जाने वो इतना क्यूं समझ न पाते हैं...!!
तुम्हें लौटा रहे हैं ख़त तुम्हारे..., कभी तुम क्या थे... खुद ही देख लेना।
न किसी के मैसेज की ख़ुशी, न किसी के अनदेखा करने का गम, बस अब गंगा घाट के किनारे ज़िन्दगी बिताएँगे हम... ✍✍
जिसे छू कर नही देखा, उसे पाने का अरमान है... मेरी हकीकत कितनी मुश्किल है, सपने कितने आसान है... ✍✍
खुबसूरत होना जरूरी नहीं पर किसी के लिए जरूरी होना बहुत खुबसूरत है
धीरे-धीरे वो अपनी जिंदगी से हमें हटाते रहे... बताकर मजबूरियां हमें वह कहीं और दिल लगाते रहे... ✍✍
फिक्र का जिक्र नहीं होता... ये प्रेम है कहकर नहीं होता..!! 🥰🥰🙏
“तुम जब चुप हो जाते हो तो..., तो बाकी सारी आवाजें 'शोर' बन जातीं हैं।”
मुकद्दर में लिखी कोई बात हो तुम... तकदीर की एक खुबसुरत सौगात हो तुम... करके प्यार तुम्हें महसुस किया... जैसे सदियों से यूँ ही मेरे साथ हो तुम... ✍✍
खुदा ने यूँ ही नहीं लिखा तुझे मेरी किस्मत में... वो भी जानता है कि मुझे कितनी मोहब्बत है तुमसे... ✍✍
तेरे पास जो है उसकी कद्र कर... यहाँ तो आसमान के पास भी खुद की जमीं नही... थोड़ा तो सब्र कर... ✍✍
“तुम जो बिछड़े हो जल्दबाज़ी में, यार...तुम रूठ भी तो सकते थे।” लोग कहते है जख्मों की नुमाइश नही होनी चाहिए... मरहम मिले तो ठीक मगर ख्वाहिश नही होनी चाहिए... ✍✍
तेरा हाथ मेरे हाथ पर हो, बस सुकून का लम्हा वही .. सारी फिक्र हवा हो जाएंगी और कोई ख़्वाहिश नहीं.;
“अब कोई दर्द...दर्द नहीं लगता, एक 'बेदर्द' ने कमाल कर दिया।”
जिस्म फ़िर भी, थक हार कर सो जाता है; दिल का भी, कोई बिस्तर होना चाहिये....
रहने को सदा जहां में आता नहीं कोई... पर तुम जैसे गये वैसे भी जाता नहीं कोई... ✍✍
कुछ हदें है मेरी, कुछ हदें है तेरी, लेकिन दायरों में भी बेहिसाब इश्क होता है।
नाराज़ आप, नाराज़ हम, कैसे मिटाएँ फ़िर ये दूरियाँ... हम मुंतिज़र, आप बेख़बर, दोनों की हैं मजबूरियाँ... ✍✍
“जिंदगी भर के इम्तिहान के बाद, वो नतीजे में... किसी और का निकला।”
तुम्हें चाहूं अंदाज़ बदल बदल कर, मेरी ज़िन्दगी का इकलौता इश्क़ हो तुम...।। ❣
वफ़ा के शीश महल में सजा लिया मैनें , वो एक दिल जिसे पत्थर बना लिया मैनें, ये सोच कर कि न हो ताक में ख़ुशी कोई , ग़मों कि ओट में ख़ुद को छुपा लिया मैनें, कभी न ख़त्म किया मैंने रोशनी का मुहाज़ , चिराग़ बुझा, दिल जला लिया मैनें, कमाल ये है कि जो दुश्मन पे चलाना था , वो तीर अपने कलेजे पे खा लिया मैनें
मिलने की चाहत फिर से❣ ........ ले आती है तेरे करीब....❣ लफ्जों की तलाश ढूँढ लेती है ❣ तेरे दिल का.पता ........❣️
अपनो की साजिसो से परेसा जिंदगी गैरो से पूछती है तरीका निजात का

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