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नर्म इश्क़ बाहों में आये तो रूमानी हो जाता है... रोम रोम में बस जाये तो रूहानी हो जाता है... जात रंग उम्र की सीमा यहां अक्सर पीछे छूटी है... जो दिल इश्क़ को जीता वो नूरानी हो जाता है... ✍✍
“सुनो... ज़रा रास्ता बताना..., मोहब्बत के सफ़र से वापसी है मेरी।”
अचानक चौँक उठे "नींद' से हम, . . किसी ने शरारत से कह दिया सुनो वो मिलने आयी हैं।
क्या कहें दिल को मेरे, तुम इस कदर भातें हों... आंखें खुलती हैं तो बस, तुम ही तुम नज़र आतें हों... ✍✍
तन्हा तन्हा सा पल और आपका प्यार से भरा एहसास... इससे बेहतर शायद और कुछ नहीं मेरे पास... ✍✍
इश्क़ जब हद से गुजर जाए, तो बीमारी है...!! और अगर हद से ना गुज़रे, तो अदाकारी है...!!!!
छिड़क लिया है तुम्हें, ज़िन्दगी के हर पन्ने पर...!! इत्र की तरह मेरे बाद भी, तुम ही महकोगे मुझमें...!!!!
खुसुर-फुसुर लम्हें करते हैं बीते कल की बातें...!! पुर्ज़ा-पुर्ज़ा दिन बिखरे हैं, रेशा-रेशा रातें...!!!!
तुम्हारे दिल की दुनिया में एक घर बनाने का इरादा है। निखर जाने की ख्वाहिश में बिखर जाने का इरादा है..
न जाने कौन सी गलियों में छोड़ आया हूँ...?? चिराग जलते हुए ख्वाब मुस्कुराते हुए...!!!!
यूं बेवजह तुम्हारी तस्वीर देखना भी, जरूरी सा लगता है...!!!!
तू चली गई दिल से, दिल में कोई और ख्वाब ना बाकी रहा... तुझको मिल गई मंजिल तेरी, और मैं अपनी मंजिल को तलाशता रहा... ✍✍
मुस्कुराओ क्या गम है, जिंदगी में चिंता किसको कम है... अच्छा या बुरा तो केवल भ्रम है... जिंदगी का नाम ही, थोड़ी थोड़ी खुशियां थोड़े थोड़े गम है... ✍✍
लो आज फिर मैं जुर्म का इकरार करता हूँ...!! दो सजा मुझे, हाँ मैं तुमसे प्यार करता हूँ....!!!!
उम्र भर की तालीम ज़ाया हुई इस तरह...!! एक शख़्स को पढ़ा तो पढ़ना आया हमें...!!!!
“कभी यूँ भी हो कि बाज़ी पलट जाये सारी..., उसे याद सताये मेरी... और मैं शुकुन से सो जाऊँ।”
आशिक़ी लिखूँ, दीवानगी लिखूँ या अपनी ख़ामोशी लिखूँ... दिल के जज़्बात अब अल्फ़ाज नहीं बनते, तू ही बता आखिर तुझे क्या लिखूं... ✍✍
नज़र में उलझनें दिल में है आलम बेक़रारी का समझ में कुछ नहीं आता, सुकूं पाने कहाँ जायें
“उसका इश्क चाँद जैसा था, पुरा हुआ...तो घटने लगा।”
दुनिया के इस हुजूम में तन्हा न कीजिए...!! सुनिए !! कसम से, आप तो ऐसा न कीजिए...!!!!
यूंही लफ़्ज़ों में समेटते समेटते एक दिन...!! हम तुम्हें अपनी दास्तां बना लेंगे...!!!!
“मिले अगर इश्क़ तो... ख़ुदा उसे पूरा करना, मेरी तरह किसी और को... युँ ना अधूरा रखना।”
मेरा कातिल ये पूछता है बड़े प्यार से...!! तकलीफ तो नहीं हुई मेरे बेवफाई के किरदार से...????
लगाकर गांठ मेरी रूह की शाख़ पर...!! तुम लिपटी हो मुझमें अमर बेल की तरह...!!!!
“लगता है फ़िर मेरे हिस्से में आयेगा समझौता कोई , आज फ़िर वो कह रहा था... समझदार हो तुम।”
कुछ दग़ाबाज़ी हम भी तेरे एतबार से करेंगें...!! ज़ालिम.. तुझसे नफ़रत भी ज़रा प्यार से करेंगें...!!!!
“हम ख़ैरियत से है अपने शहर में, तुम अपने शहर में अपनी हिफ़ाज़त रखना।”
तुमको अपना प्रेम कहूँ, या ढूंढूँ तुममें प्रेम...!! बीत ना पाते तुम बिन दोनों, क्या दिन हो क्या रैन...!!!!
फ़िर से खोना नही तुम्हें, इसलिए पाने की जिद भी नही..!!
“एक दिन मजबूरियाँ अपनी गिना देगा..., काश मालूम होता वो किस जगह दगा देगा।”
सुनो जी मैंने तुम्हें सिर्फ अपना दिल ही नहीं दिया है इस दिल मे चलने वली हर सांस तुम्हारे नाम की है।
मोहब्बत छिपाने की अदा,यूँ बेकार हो गयी...!! जुबां तो रही बस में, आँखें गद्दार हो गई...!!!!
एक बार भूल से ही कहा होता की हम किसी और के भी है, खुदा कसम हम तेरे सायें से भी दूर रहते...
💞कुछ उलझा सा हूँ...🤔 तुम्हारे लिये झुमके लेने को,💕 💕हर झुमका बेताब है यहाँ, तुम्हारे कानों में झूलने को गालों को चूमने को...✍️
हमारे तो होठ भी इतनी बातें नहीं करते...!! जितनी बातें तुम्हारी ये आंखें करती हैं...!!!!

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