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Two Line Shayari

दो ही हमसफर मिले जिन्दगी में..
एक सब्र ...तो दूसरा इम्तिहान ...
🥀🥀

 
मुझसे जुदा हुए तो
बरसों हो गये हैं,
घडी अब तक पहनते हो,
किसका इंतज़ार रहता हैं।

गुजारिश हमारी वह मान न सके,
मज़बूरी हमारी वह जान न सके,
कहते हैं मरने के बाद भी याद रखेंगे,
जीते जी जो हमें पहचान न सके।

हर रात एक नाम याद आता है,

कभी सुबह कभी शाम याद आता है,

जब सोचते हैं कर लें दूसरी मोहब्बत,

तब पहली मोहब्बत का अंजाम याद आता है.
सब सही करके भी गलत हूँ मैं,
ये कैसी तेरी फरियादें हैं....

मैंने रात में दिल का कमरा जला दिया,
सुबह फिर भी तेरी यादें हैं...!🥀✍🏿

लोग समझते हैं के मैं तुम्हारे हुस्न
पर मरता हूँ

अगर तुम भी यही समझती हो तो
सुनो....

जब हुस्न खो दो, तब लौट आना

तारीफे फिर सुन रहा हूं मै कुछ लोगो से

लगता है फिर किसी को मुझसे काम पड़ने वाला है...

जो नहीं होता है उसका ही ज़िकर होता है ,

हर इक सफ़र में मेरे साथ में घर होता है ,

मैं इक फ़कीर से मिलकर ये बात जान गया ,

दवा से ज़्यादा दुआओं में असर होता है।


न ज़ख्म भरे, न शराब सहारा हुई,

न वो वापस लौटीं न मोहब्बत दोबारा हुई 🥀..✍🏿


एक तुम्हें ही देखने की चाह,,

तन्हा रखती है ख्यालों की भीड़ में भी....🥀🥀

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