दर्द हमने संभाला है, आँसू हमने बहाए हैं जो अपने हुआ करते थे, अब वो पराये हैं
इस मोहब्बत की कहानी में ऐसे भी मोड़ आते हैं जिनको दिल में रखते हैं, वही दिल तोड़ जाते हैं
ये लफ्ज़ भी तो खामोशी से लड़ते हैं जिस तरह अब गम हंसी से लड़ते हैं
मुझे यकीन है मोहब्बत उसी को कहते हैं, कि जख्म ताज़ा रहे और निशान चला जाये।
ए खुदा उन्हे हमेशा खुश रखना जिन्हे, हम तुमसे भी पहले याद किया करते है.......
आज भी, ये बात हम समझ ही नहीं पाते हैं मुट्ठी जितने दिल में कैसे ज़माने के गम समाते हैं ?
साथ साथ घूमते है हम दोनों रात भर लोग मुझे आवारा और उसे चाँद कहते है
कुछ गमों को कुछ दर्दों को शब्दों से बयां करता हूं कुछ बिखरे कतरे, कुछ एहसास लिखा करता हूं
नहीं है कुछ भी मेरे दिल में सिवा उसके मैं उसे अगर भुला दूँ, तो याद क्या रखूँ
खुद को भूल जाना भी एक मजबूरी थी मेरी हर आरजू भी जैसे बेहद जरूरी थी हर याद को, हर दर्द को समेटता रहा मैं न जाने क्यों वो मोहब्बत भी जरूरी थी
काबिल-ए-तारीफ बनकर भी कहां जाना है मिट्टी के ही खिलौने है, यहीं बिखर जाना है
रूह तक अपनी बात पहुंचाने का दम रखते हैं ये लफ्ज़ भी तो, सीधा दिल में, कदम रखते हैं
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| By Pawan Parmar |


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