जिनको मैं बुरी लगती हूं उनको पूरा हक है अपनी आखों में मिर्ची डाल ले🤣🤣🤣🙈
जरा गौर से पढ़ लो, हमारी शायरी तुम! तुम्हारा जिक्र नहीं, मगर तुम ही तुम हो! एक शख़्स कैसे बदल देता है दुनियाँ सारी... जब इश्क़ होगा तो समझ आएगा...!!
कुछ दिन पहले एक्स से बात हुई थी और तभी से एक्स वाई जेड सबसे बातें हो रही__
जहाँ से अपने दोस्त ना दिखे.. वो उँचाई किस काम की ..
मैंने ऊंचाई से भी देखा है अक्सर कुछ चेहरे बेरंग ही नजर आते है 🤣😝😜
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प्यार एक धोखा है। आओ मिलकर इसे ख़तम करे
करेंगे श्रृंगार तुम्हारा एक दिन अपनी शायरियों से हम... जरा बैठो कभी, हमारे सामने मोहब्बत बनकर 🥀
एक बात याद रखना..... ढूंढने से वो मिलेगा जो खो गया...... वो नहीं जो किसी और का हो गया.......
तेरी आंखों को पढ़कर में अब भी सारे राज बता सकता हूं हर्फ से हर्फ जोड़कर प्यार के सारे एहसास जता सकता हूं गहने, कंगन, झुमके, के बिना भी में तुम्हें सजा सकता हूं मैं शायर हूं, अपने लफ्जों से ही तुम्हें दुल्हन बना सकता हूं 🥀
फ़रिश्ते ही होंगे जिनका हुआ इश्क़ मुकम्मल...!! इंसानों को तो हमने सिर्फ बर्बाद होते देखा है...!!
कौंन कहता है कि मैं पसंद नहीं किसी को मुसीबतों से पूछो कितना चाहती है मुझे!
सुनों किसी शायर को मोहब्बत में दगा मत देना... वो जान दे न दे... लिख लिख कर तुम्हारी आत्मा निचोड़ ज़रूर लेगा...!!😂
छोटी सी तो है जिंदगी… . अपने पसंंदिदा इंसान के साथ जियो… . जो आपको हर वक्त खुशी और… . प्यार देना चाहता है… .
सुनो .. ये प्यार व्यार मे कुछ नही रखा है .. जो कुछ भी रखा है फ्रिज मे रखा है ... 😋😋😂🙈
मैं खुद उलझा हूं, अपनी ही, कहानी में अब कैसे नए किस्से का किरदार बनू मैं 🥀😕
कोई इन उलझनों को सुलझाना सिखा दे रात के अंधेरों को रौशन करना सिखा दे जब घिरे हों दर्द से हमारे दिल, जब जवाब न आये कोई उस वक़्त कोई रास्ता निकालना सिखा दे
हां बेहद खूबसूरत है उलझने भी मेरी यादों के किस्से में कोई चराग ना कर सका रौशनी इन दर्द भरी राहों में भी ️सिर्फ ये उलझने ही तो हैं अब मेरे हिस्से में 🥀
एक वक्त के बाद हर कोई गैर हो जाता है, उम्र भर किसी को अपना समझना बस वहम है...!!
ज़िन्दगी भर के रास्ते बिखरे पड़े हैं मंजिलों से दूर मुश्किलों से जुड़े हैं हर लम्हा एक नयी पहेली हर लम्हे में तन्हाई मेरी मुस्कुराहटों में भी दर्द के साये फैले पड़े हैं
जिंदगी के बिखरे रास्तों पर फिर से नई कहानी लिखूंगा मैं... अब हर सफर में मंजिलों की रवानी लिखूंगा मैं... सुलझा दूंगा पहेली जैसी जिंदगी को एक दिन में भी... तोडूंगा ये दर्द और तन्हाई से भरे साये उसको अपनी जिंदगानी लिखूंगा मैं 🥀
लिखोगे पर क्या मेरी कहानी लिख पाओगे जहाँ दर्द के सिवा कुछ नहीं दास्ताँ मेरी तन्हाई की
जिसमें साथ दिया है बस आंसुओं की लहरों ने जहाँ जोड़ कर रखा है लफ़्ज़ों के पहरों ने...
वो रात दर्द और सितम की रात होगी, जिस रात रुखसत उनकी बारात होगी, उठ जाता हु मैं ये सोचकर नींद से अक्सर, के एक गैर की बाहों में मेरी सारी कायनात होगी…..
बड़े हमदर्द बनते थे बड़े बेदर्द निकले हो🥺
अब ज्यादा हमदर्दी ना जताया कर मिलकर बाटेंगे दुख भी बताया कर


🙏Thanks for suggestion 🙏