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| ❤️🍃 शहर बसाकर अब सुकून के लिए गाँव ढूँढते हैं, बड़े अजीब हैं हम लोग,हाथ में कुल्हाड़ी लिए छाँव ढूँढते हैं.....❣✍🏿 |
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| ❤️🍃 दस्तक और आवाज तो कानों के लिए है,, जो रुह को सुनाई दे उसे खामोशी कहते हैं......❣✍🏿 |
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| ❤️🍃 चाहत के बदले नफ़रत का, नश्तर लेकर बैठे हैं पीने का पानी मांगा तो, सागर लेकर बैठे हैं लाख भलाई कर लो, लेकिन लोग बुराई करते हैं हमने जिनको फूल दिए, वो पत्थर लेकर बैठे हैं....❣✍🏿 |
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| ❤️🍃 वो जिनके दम से जहां में, तेरी खुदाई है उन्हीं लोगों के लबों से, ये सदा आई है समन्दर तो बना दिए, मगर बता मौला तूने सहरा में नदी, क्यूं नहीं बनाई है..❣✍🏿 |
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| ❤️🍃 जैसे तुमने हाथ में वक्त को रोका हो, सच तो ये है तुम बस आंखों का धोखा हो, इसी लिए तो तुम सबसे ज्यादा भाती हो, कितने सच्चे दिल से झूटी कसम खाती हो....❣✍🏿 |
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| ❤️🍃 उसकी तस्वीरें हैं दिलकश तो होंगी, जैसी दीवारें हैं वैसा साया है, एक मैं हूं जो तेरे कत्ल की कोशिश में था, एक तू है जो जेल में खाना लाया है .....❣✍🏿 |
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| 🍃 इसलिए हम ने बुराई से भी नफ़रत नहीं की, क्यूँकि हम ढूँढ़ रहे थे कोई अच्छा इक दिन.......❣✍🏿 |
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| 🍃 यूँ तसल्ली दे रहे हैं हम दिल-ए-बीमार को जिस तरह थामे कोई गिरती हुई दीवार को कुछ खटकता तो है पहलू में मेरे रह रह कर अब ख़ुदा जाने तेरी याद है या दिल मेरा.......❣✍🏿 |
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| 🍃 उन आँखों पर भी नींद कैसे आए, जिनमे पहले से कोई जाग रहा हो.🙂....❣✍🏿 |
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| 🍃 तू नदी है तो अलग अपना, रास्ता रखना न किसी राह के, पत्थर से वास्ता रखना पास जाएगी तो खुद, उसमें डूब जाएगी अगर मिले भी समन्दर, तो फासला रखना...🙂✍🏿 |
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| 🍃 ग़मों के बीच भी जो लोग मुस्कराते हैं वही इंसानियत का हौसला बढाते हैं लोग कांटों को तो छूने से भी कतराते हैं फूल होते हैं तो पहलू में रखे जाते हैं...🙂✍🏿 |
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| 🍃 सोने चांदी को खजानों में रखा जाता है बूढे लोगों को दालानों में रखा जाता है रंग होते हैं बस, खुशबू नहीं होती जिनमें उन्हीं फूलों को गुलदानों में रखा जाता है...🙂✍🏿 |
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| 🍃 तपती हुई ज़मीं है जलधार बाँटता हूँ पतझर के रास्तों पर मैं बहार बाँटता हूँ ये आग का दरिया है जीना भी बहुत मुश्क़िल नफ़रत के दौर में भी मैं प्यार बाँटता हूँ...🙂✍🏿 |














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