यहां गांव बागली क्षेत्र से करीबन 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है इस गांव का नाम नाहर झाबुआ है इसी के साथ इस गांव के पास से एक नदी बहती है जो अपनी विशालकाय पानी की तेज गति के साथ गिद्दा खो से निकलती है, क्योंकि यहां गांव जंगलों से घिरा हुआ है इसलिए इस गांव में काफी मनभावन दृश्य देखने को मिलता है और यहां पर आकर मन में अपार शांति का अनुभव होता है ।
अगर हम पगडंडी से बागली तक जाते हैं तो करीबन 9 से 10 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता है जिसके पश्चात आप आसानी से इस गांव से बागली तक पहुंच सकते हो ।🤗
इस गांव के समीप कांगरिया का पहाड़ भी है, जो साथ ऊंची ऊंची पहाड़ियों से मिलकर बना है यहां पर प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आना-जाना बना रहता है, इस पर्वत की बात करें तो लोगों का मानना है कि यहां पर पूजा करने से बरसात आती है और बेमौसम पानी बरसता है . 🙏
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